अनादि काल से भारत में आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा वेदों और उपनिषदों के माध्यम से तथा तत्वदर्शी ऋषि योंके स्वानुभव से अविरत प्रवाहित होती रही है। युगों-युगों से विभिन्न शास्त्रसम्मत संप्रदायों और दिव्य गुरु परंपराओं के माध्यम से इस अतिंम सत्य का चिंतन और अनुसन्धान निरंतर चलता आ रहा है। इसी इंचगिरी संप्रदाय की दिव्य गुरु परंपरा में श्री निसर्गदत्त महाराज एक महान संत थे । जनवरी 2022 में, श्री निसर्गदत्त महाराज की समाधि स्थापना उनके सद्गुरु श्री सिद्धरामेश्वर महाराज की पावन समाधी स्थल के पास मुंबई के वालकेश्वर बाणगंगा में की गई। श्री निसर्गदत्त महाराज की शिक्षाएं उनके ग्रंथ "I Am That", जिसे आधुनिक उपनिषद भी कहा जाता है, के माध्यम से दुनिया की लगभग सभी भाषाओं में प्रकाशित होकर विश्वभर में फैल चुकी हैं। उनकी वाणी, उनके कई अप्रकाशित ग्रंथ और व्याख्याएं, साथ ही इंचगिरी संप्रदाय के अन्य महान संतों की शिक्षाएं, उपनिषद और वेदांत का ज्ञान इच्छुक साधकों तक पहुंचाने के पवित्र उद्देश्य से "निसर्गदत्त चैरिटेबल समाधि ट्रस्ट" ने "निसर्गवाणी" नाम से एक ऑनलाइन त्रैमासिक पत्रिका निकालने का संकल्प लिया है। इस संप्रदाय में कई संत कन्नड़ भाषी भी रहे हैं, इसलिए उनकी शिक्षाओं को मराठी लोगों तक पहुंचाने के लि ए इस मासिक पत्रिका में लेख मराठी, हिंदी, कन्नड़ और अंग्रेजी इन चार भाषाओं में प्रकाशित किए जाएंगे। यह पत्रिका पूर्णतः निःशुल्क होगी और इसके लिए किसी प्रकार की कोई भी दान राशि आवश्यक नहीं होगी। हमारा उद्देश्य केवल इन पवित्र शिक्षाओं को सभी साधकों तक पहुंचाना है।
जय सद्गुरू !